साहिबा, आए घर काहे ना? ऐसे तो सताए ना
देखूँ तुझको, चैन आता है
साहिबा, नींदें-वींदें आए ना, रातें काटी जाए ना
तेरा ही ख़याल दिन-रैन आता है
साहिबा, समुंदर मेरी आँखों में रह गए
हम आते-आते, जानाँ, तेरी यादों में रह गए
ये पलकें गवाही हैं, हम रातों में रह गए
जो वादे किए सारे बस बातों में रह गए
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